Marketing kya hai और यह किस तरह से काम करती है पूरी जानकारी ?

लोगो ने अलग -अलग website पर अलग -अलग तरीके बताये है की Marketing kya hai होता आज हम इस post के जरिये जो बताने जा रहे है वह बिलकुल जमीनी तौर पर काम करता है तो चलिए और post को पूरा पढ़े इसमें आप का कुछ समय जरूर लगेगा हा लेकिन आपको मार्केटिंग के बारे में बहुत बढ़िया जानकारी मिलेगी ?


Marketing kya hai- एक विक्रेता के लिए Marketing  से आशय ग्राहकों को वस्तुएँ बेचना है। एक किसान   के लिए

अपनी फसल  बाजार में बेचना ही मार्केटिंग  है। किसी महिला के लिए marketing का अर्थ बाजार जाकर

खरीददारी करना है। वास्तव में,Marketing ‘ शब्द सर्वाधिक प्रचलित परन्तु सर्वाधिक अस्पष्ट शब्द है

इसी कारण  विशेषज्ञों ने ‘Marketing’ शब्द का प्रयोग अपनी स्थिति, योग्यता, आवश्यकता

एवं वातावरण के अलग -;अलग  किया है।

आप मार्केटिंग से क्या समझते है ?

आमतौर Marketing kya hai  से अभिप्राय वस्तुओं के क्रय-विक्रय (Buy sell) से लगाया जाता है, जबकि marketing 

का वास्तविक अर्थ इससे कहीं अधिक विशाल  है। वास्तव में, Marketing का अर्थ केवल वस्तुओं के

 Buy sell से ही नहीं है, बल्कि इसमें वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन (production) से पूर्व की जाने वाली

क्रियाओं से लेकर उनके वितरण (Delivery) एवं आवश्यक After sale सेवाओं तक को सम्मिलित किया

जाता है। इस post के माध्यम से हम अआप्को बताये गे की Marketing kya hai ?, marketing की विशेषताएँविशेश्ने क्या है ?, और इसके प्रक्रति और इम्पोर्टेन्ट क्या हो सकते है ?

Marketing की विशेषताएँ (Marketing features)

(Characteristics of Marketing)

Marketing की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1)  आय (Revenue) का सृजन (Creation) करता है।

(2)  समाज के जीवन-स्तर में वृद्धि करता है।

(3)  वस्तुओं एवं सेवाओं का वितरण करना ।

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4) Marketing के   अन्तर्गत उपयोगिताओं का सृजन  (Creation) किया जाता है।

5)  उपभोक्ताओं को अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करता है Marketing।

6) Marketing is business philosophy जिसका समाज से निकटतम सम्बन्ध है।

7) मार्केटिंग  एक गतिमान प्रणाली है जो एक संस्था को उसके बाजारों से जोड़ती है।

8) marketing एक क्रियात्मक कार्य है जो उत्पाद को उत्पादन केन्द्रों से Consumption  केन्द्रों तक

पहुँचाने से सम्बन्धित है।

9) मारकेटिंग का कार्य-क्षेत्र अत्यन्त Comprehensive है, क्योंकि इसमें उत्पादन से पूर्व तथा Sell

के बाद की क्रियाएँ भी सम्मिलित हैं।

10) marketing एक (Professional) व्यावसायिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा उत्पादों को बाजार के अनुरूप

बनाया जाता है और Transfer of ownership किये द्वारा किये  जाते हैं।

Marketing की प्रकृति (Nature of marketing)

मार्केटिंग  की प्रकृति या स्वभाव का अध्ययन Following headings के अन्तर्गत किया जा
सकता है-

1 ) मार्केटिंग एक Human  क्रिया है- क्योंकि इसमें लोगो  की सन्तुष्टि हेतु  प्रयत्न किये जाते हैं।

(2) मार्केटिंग  एक सामाजिक एवं आर्थिक (Social and economic) क्रिया है-वर्तमान समय में अगर देखा जाये तो  तो मार्केटिंग  एक सामाजिक एवं आर्थिक क्रिया है, जिसका प्रमुख उद्देश्य समाज के व्यक्तियों की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि करके उचित लाभ अर्जित क्रिया है।

(3) और यह  एक Exchange  प्रक्रिया है- क्योंकि इसमें उत्पादक एवं Possible Consumers के बीच मूल्य के बदले वस्तु, सेवा अथवा उपयोगी वस्तुओं का लेन-देन किया जाता है।

(4)Marketing is functional -मार्केटिंग  की इस प्रकृति के अनुसार मार्केटिंग  उन क्रियाकलापों

का अध्ययन करता है जो उत्पादन केन्द्रों से Consumption केन्द्रों तक वस्तुएँ पहुँचाने से सम्बन्धित

होती हैं।

Marketing का क्षेत्र  Marketing area?

(Scope of Marketing)

Generally, the following areas are covered under the area of marketing-

1) उत्पाद सम्बन्धी निर्णय (Product decision)-उत्पाद सम्बन्धी निर्णय के तहत् यह निश्चित किया जाता

है कि कौन-सी वस्तु कितनी मात्रा में उत्पादित (Produced) करनी है तथा वस्तु का आकार, रंग, डिजाइन,

ब्राण्ड, पैकिंग आदि किस प्रकार होंगे, ताकि उपभोक्ताओं (Consumers) को अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त हो सके।

(2) वितरण मार्ग सम्बन्धी निर्णय (Delivery route decision)-वस्तु का मूल्य निर्धारित होने के पश्चात् यह

निश्चित किया जाता है कि वस्तु को किस माध्यम से Delivery किया जाये, Delivery मार्ग का चयन

किस आधार पर किया जायेकितना लम्बा मार्ग चुना जाये तथा उस पर कितना व्यय किया जाये आदि।

3) मूल्य सम्बन्धी निर्णय (Price decision)-उत्पादित वस्तु को उपभोक्ता तक किस मूल्य पर भेजा जाये

इसका निर्णय करना भी marketing के क्षेत्र में आता है। उत्पादन की अधिक सफलता मूल्य पर ही

निर्भर करती है। अतः मूल्य सम्बन्धी निर्णय लेते समय विभिन्न  components को ध्यान में रखना

आवश्यक है।

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-4) प्रवर्तन सम्बन्धी निर्णय (Enforcement decision)-विक्रय वृद्धि या प्रवर्तन सम्बन्धी निर्णय भी मार्मेंकेटिंग में 

शामिल हैं, जैसे विज्ञापन किया जाय या नहींविज्ञापन के लिए किस साधन को अपनाया जाय,

साथ ही विज्ञापन कब, कहाँ, और कितना किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोगों को वस्तु

खरीदने के लिए आकर्षित किया जा सके।

(5) उपभोक्ता सम्बन्धी निर्णय (Consumer decision)-marketing में Consumer के सम्बन्ध में निर्णय लिए

जाते हैं कि ग्राहक किस वस्तु को पसन्द करता हैकितने मूल्य पर चाहता है तथा वर्तमान ग्राहकों

की संख्या एवं उनका क्षेत्र कितना है। सम्भावित ग्राहकों या उपभोक्ताओं की संख्या व क्षेत्र कितना

है आदि सभी बातों का विस्तृत रूप से अध्ययन कर निर्णय लिये जाते हैं।

Marketing का महत्व (Importance of marketing)

वर्तमान समय में प्रत्येक संस्था या फर्म की व्यावसायिक क्रियाओं में marketing को प्रथम

स्थान दिया जाता है। दूसरे शब्दों में, “marketing के निर्णयों के आधार पर ही अन्य व्यावसायिक

क्रियाएँ निष्पादित (Executed) की जाती हैं।” पीटर एफ. डुकर के अनुसार, “marketing  ही व्यवसाय है।

व्यवसाय कार्य के रूप में मार्केटिंग  के महत्व को निम्न शीर्षकों के तहत् समझाया जा सकता है-

Importance of Marketing

आधुनिकीकरण में मददगार (Helpful in modernization)-वर्तमान समय में marketing उपभोक्ताओं की Future माँग की किस्म एवं संख्या को निर्धारित करता है और उसी के अनुरूप उत्पादन की सलाह देता

है, फलस्वरूप बदलती हुई स्थितियों के अनुसार आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिलता है और

उद्योग Future की  माँग की पूर्ति करने में सक्षम होता है।

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2 लाभों में वृद्धि-(Increase in benefits-) प्रत्येक फर्म का मुख्य उद्देश्य लाभ अर्जित करना होता है। marketing

एक ओर विभिन्न मार्किट  लागतों में कमी करके वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कमी करता

है और दूसरी ओर marketing के आधुनिक तरीकों, जैसे -Advertisement, Sales Promotion आदि के द्वारा

वस्तुओं और सेवाओं की माँग में वृद्धि करता है। फलस्वरूप वस्तुओं को लागतों में कमी और

माँग में वृद्धि होने के कारण कुछ sale में वृद्धि होती है जिससे फर्म के लाभों में वृद्धि होती है।

3 नियोजन और निर्णयन में सहायक- (Assist in planning and decision- आधुनिक परिवर्तित परिस्थितियों (Changed circumstances) में उत्पादन क्षमता के अनुसार Planning करना खतरे से खाली नहीं है। production  Planning   करने से पहले प्रत्येक संस्था को बिक्री पूर्वानुमान (Sales forecast) करना चाहिये कि वस्तुओं या सेवाओं की माँग क्या होगी?

उसका कुल बाजार में क्या हिस्सा होगा? इसके पश्चात् ही  head of the organization is Product Planning, Production, purchase and sale आदि विभागों की क्रियाओं में Coordination स्थापित कर सकता है।

उत्पादन करने वाली वस्तुओं, उनकी विशेषताओं, कीमत, Delivery vessels, विज्ञापन एवं

विक्रय माध्यम आदि के सम्बन्ध में सही निर्णय लेने में भी marketing सहायक होता है।

1 thought on “Marketing kya hai और यह किस तरह से काम करती है पूरी जानकारी ?”

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