Consumer Behavior क्या है। और कैसे काम करता है। जाने ?(2021)

Consumer/Buyers का अर्थ एवम परिभाषाए? (Meaning / Definition of Consumer / Buyers?)

Consumer Behavior –उपभोक्ता (Cunsumer)  या Buyer अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की सन्तुष्टि के लिए क्या, कब,कितनी, कैसी, कहाँ और किससे वस्तुएँ एवं सेवाएँ खरीदते हैं.

और ऐसी खरीद किस व्यवहार कापरिणाम होती है उसे Consumer Behavior या    Buyer  व्यवहार कहा जा सकता है। Market की स्थिति जानने के लिए Consumer के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

Consumer के Behavior का अध्ययन इसलिए भी किया जाता है कि ताकि Sale में वृद्धि हो सके और ग्राहकों को मनचाही वस्तु मिल सके।

आज के  समय में बाजार Buyer  या Consumer पाये जाते हैं वे रुचि, स्वभाव, फैशन  , Mental level, आदत, Educational level, जीवन स्तर व आर्थिक स्तर (Economic level) आदि  से देखा जाये तो  अलग-अलग पाये जाते हैं।

इस दशा में प्रत्येक Buyer का व्यवहार एक सा होना सम्भव नहीं है। साथ ही  यह देखने में आता है कि प्रत्येक Consumer का व्यवहार पल-पल बदलता है। इसके अनेक कारण होते हैं। Consumer का व्यवहार एक मनोवैज्ञानिक कारण है जिसके अन्तर्गत यह देखा जाता है ।

कि वस्तु खरीदते समय Consumers  द्वारा किस प्रकार का व्यवहार किया जाएगाअर्थात् उपभोक्ता वस्तु Buy करना पसन्द करेंगे अथवा नहीं, किन Buyers द्वारा वस्तु खरीदीजाएगी, वस्तु का कितना मूल्य Buyers  द्वारा मिलने की आशा है,

वे किस किस्म का एवं कितनी मात्रा में माल Buy करना चाहते हैं. आदि बातों का अध्ययन करना ही कांसुमेर Behavier है।

2 उपभोक्ता व्यवहार की प्रकृति (Nature Of Consumer Behaviour)

Consumer Behaviour की प्रकृति को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) मानव व्यवहार का अंग-(Part of human behavior) Consumer Behaviour  मानव व्यवहार का ही एक अंग है जो

वस्तुओं एवं सेवाओं के क्रय से मुख्य रूप से सम्बन्धित है।

(2) मानसिक चिन्तन-(Mental thinking) Consumer Behaiviour  Mental thinking  है जिसके अन्तर्गत Consumers 

के मस्तिष्क में चलने वाले Thoughts, emotions, waves एवं धारणाओं का अध्ययन किया जाता है।

(3) अनिश्चितता का तत्व (Element of uncertainty) –Consumer Behaiviour में Element of uncertainty निहित है, क्योंकि यह गारण्टी से नहीं कहा जा सकता कि Consumer  किस समय पर किस प्रकार का व्यवहार करेगा।

(4) अन्तर्विषयक प्रकृति(Interdisciplinary nature)-Consumer Behaiviour में अन्तर्विषयक प्रकृति है। इसे समझने के लिए विभिन्न विषयों, जैसे-मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानव-शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र  आदि का अध्ययन करना होगा।

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(5) Marketing अवधारणा का आधार(Marketing concept base)-वर्तमान Consumer Behaiviour Marketing concept  का Base  है। समस्त Marketing Processes Consumer Behavior के चारों ओर मँडराती हैं।

Marketing concept की सफलता ही Consumer Behaiviour  के अध्ययन पर निर्भर करती है।इस सिद्धान्त के अनुसार विक्रय-प्रबन्धक भावनात्मक क्रय प्रेरणाओं का पता लगाकर उनके प्रचार द्वारा Consumer की भावना को प्रेरित करता है।

(6) सामाजिक Consumer Behaiviour(Social Consumer Behavior)-Consumer  एक सामाजिक प्राणी है और वह किसी न किसी रूप में समाज से सम्बन्धित अवश्य होता है, अत: उसका व्यवहार सामाजिक तत्वों से अधिक प्रभावित होता है।

वह वस्तु को खरीदने का निर्णय लेने से पहले इस बात पर अवश्य विचार करता है कि उसके द्वारा क्रय की समाज में क्या प्रतिक्रिया होगी। अतः इस सिद्धान्त के अनुसार एक Sales manager को समाज की रीति-रिवाजों, आदतों, फैशन आदि का ध्यान रखना चाहिए।

(6) विवेकपूर्ण उपभोक्ता व्यवहार(Prudent consumer behavior)-विवेकपूर्ण उपभोक्ता व्यवहार से तात्पर्य ऐसे व्यवहार से है जिसमें वस्तु Buy करने का निर्णय करने के लिए  consumer विवेक एवं बुद्धि को प्रधानता देता है।

इस सिद्धान्त के अनुसार  consumerद्वारा Buy की जाने वाली वस्तु की कीमत,Consumption, sustainability,, Service, reliability आदि तत्वों पर विचार करके ही Buy करने का निर्णय लेता है। इस प्रकार के व्यवहार में Buyer को निर्णय लेने के लिए अधिक समय एवं ध्यान की जरूरत होती है।

3 उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित करने वाले प्रमुख (Major influencing consumer behavior)

consumer behavior को प्रभावित करने वाले प्रमुख घटकों को निम्न प्रकार समझाया जा सकता है-

(1) व्यक्तिगत आय(personal income)-व्यक्तिगत आय Buyer  की Buy करने की शक्ति को प्रभावित करती

है। व्यक्ति की आय यह स्पष्ट करती है कि Consumer किस सीमा तक सेवाओं का प्रयोग कर सकता

(2) परिवार की आय(Family income)-भारत जैसे देश में जहाँ संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित है, व्यक्ति की आय के साथ उसके परिवार की आय और परिवार का आकार भी Consumer purchase व्यवहार को प्रभावित करता है।

यदि परिवार की आय गरीबी की रेखा से नीचे है तो उनका Purchasing income से अधिक होगा और उनका व्यवहार उन व्यक्तियों से भिन्न होगा जिनकी आय गरीबी की रेखा से काफी अधिक है।

(3) आय की सम्भावनाएँ(Income possibilities)-Consumer अपने व्यय(Expenditure) की योजना केवल अपनी वर्तमान आय के आधार पर ही नहीं बनाता, वरन् भविष्य में होने वाली आय की सम्भावनाओं को भी ध्यान में रखता है।

साधारणतया Future income की सम्भावना एक व्यक्ति को अधिक Buy करने के लिए प्रेरित करती है, जबकि भविष्य में आय की सम्भावना न होने पर कम Buy की सम्भावना रहती है

(4) Consumer की साख(Consumer credit)-Consumer अपने Purchasing behavior को बाजार में अपनी credit  के आधार पर भी निर्धारित करता है। यदि किसी Buyer को कोई वस्तु उधार मिल रही है तो उसका व्यवहार कुछ और होता है और जब वस्तु नकद मिलती है तो उसका व्यवहार कुछ और होता है ।

(5) सरकारी नीति(Government policy)-सरकार की नीति भी Buyer के व्यवहार को प्रभावित करती है। यदि सरकारी नीति आयकर को बढ़ाने की है तो Consumer की purchasing power कम हो जायेगी और उसके द्वारा आवश्यकताओं को कम किया जायेगा।

(I) मनोवैज्ञानिक घटक (Psychological Factors)

Consumer Behaiviour को प्रभावित करने वाले प्रमुख मनोवैज्ञानिक घटक निम्न प्रकार हैं-

(1) ज्ञान या सीखना-ज्ञान सिद्धान्त(Knowledge or learning theory) –Consumer के  Behaiviour को प्रभावित करता है। उचित ज्ञान के अभाव में घरों में गैस सिलैण्डर के प्रयोग का विरोध किया जाता था.

लेकिन उचित ज्ञान होने पर इसका प्रयोग व्यापक रूप से बढ़ा है। इस सम्बन्ध में Seller or producer advertisement के द्वारा अथवा Misconceptions के निवारण द्वारा Consumers  को उचित जानकारी प्रदान कर सकता है

(2) आवश्यकताओं का क्रम(Order of requirements)-Consumer Behaiviour  इस बात से भी प्रभावित होता है कि उसे अपने किस स्तर की आवश्यकता की पूर्ति करनी है, अर्थात् वह मूल आवश्यकता की पूर्ति कर रहा है या Comfortable and luxury की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा 

(3) उपभोक्ता की कल्पना(Consumer imagination) –किसी उत्पादक, वस्तु, ब्राण्ड या किस्म के प्रति Consumer के मन में कल्पना भी उसके Purchasing behavior को मुख्य रूप से प्रभावित करती है।

(II) सामाजिक घटक (Social Factors)

Consumer Behaiviour  को प्रभावित करने वाले प्रमुख सामाजिक components निम्न प्रकार हैं-

(1) परिवार(family)-परिवार का वातावरण, परिवार में वस्तुओं का प्रयोग उस परिवार के व्यक्तियों के Purchasing behavior को प्रभावित करता है।

(2) सन्दर्भ समूह(Reference group)-मित्रों, परिचितों, रिश्तेदारों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों इत्यादि की राय, सुझाव और अनुभव भी Consumer के व्यवहार को काफी सीमा तक प्रभावित करते हैं।

(सादा जीवन उच्च विचार, खाओ पिओ मौज करो)

(3) सामाजिक वर्ग(Social class)-आय, जाति या धर्म की vision से सामाजिक वर्ग भी Consumer  के Purchasing behavior को निर्धारित करता है।

(4) संस्कृति(culture)-खान-पान,कपडे  इत्यादि के Buy में उस क्षेत्र विशेष की संस्कृति का काफी प्रभाव पड़ता है जहाँ पर  Consumer  अपने परिवार सहित निवास कर रहा है।

Consumer’s Behaviour के सिद्धान्त । 

एक Marketing manager द्वारा Consumer व्यवहार को जानने के लिए निम्नलिखित Theorie को अपनाया जाता है-

(1) स्वाभाविक consumer व्यवहार(Natural consumer behavior)- Natural consumer व्यवहार से तात्पर्य ऐसे व्यवहार से है जो उसकी अन्तर्निहित(Inherent) आवश्यकताओं से प्रेरित होता है,

जैसे-भूख लगना, प्यास लगना, विश्राम की इच्छा होना, सुरक्षा की आवश्यकता महसूस करना आदि। इन आवश्यकताओं से प्रेरित होकर वस्तु Buy को Natural consumer  व्यवहार कहा जायेगा

(2) मनोवैज्ञानिक Consumer व्यवहार(Psychological  behavior)-मनोवैज्ञानिक consumer  व्यवहार से आशय consumer के व्यक्तित्व एवं Product की विशेषताओं अथवा गुणों केcombination से है।

जैसे एक व्यक्ति भूख लगने पर क्या खायेगा एवं कितनी मात्रा में खायेगा यह उसकी आदत, कीमत, भावना, , हैसियत, Satisfaction of the senses, सुविधा, प्रतिष्ठा आदि बातों पर निर्भर करता है।

(3) सीखे हुए Consumer व्यवहार(Learned Consumer Behavior)-सीखे हुए व्यवहार से आशय ऐसे व्यवहार है जिसे व्यक्ति अपने वातावरण एवं सामाजिक परिवेश में सीखता है। जैसा समाज होगा वैसा ही व्यक्ति का व्यवहार होगा। भूख शान्त करने के लिए व्यक्ति रोटी खाये या माँस खाये अथवा फलों का प्रयोग करे इसका निर्धारण व्यक्ति समाज से सीखकर ही करता है।

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(4) भावनात्मक consumer व्यवहार(Emotional consumer behavior)-भावानात्मक consumer व्यवहार से आशय ऐसे व्यवहार से है, जिसमें मस्तिष्क या विवेक के स्थान पर हृदय या भावना की प्रधानता रहती है।

इसमें अहंकार, प्रतिष्ठा, ईर्ष्या, शत्रुता, प्रेम, सुन्दरता आदि को शामिल किया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार Sales manager भावनात्मक Purchasing motives का पता लगाकर उनके प्रचार द्वारा consumer  की भावना को प्रेरित करता है।

(5) सामाजिक consumer व्यवहार(Social consumer behavior)-consumer एक सामाजिक प्राणी है और वह किसी न किसी रूप में समाज से सम्बन्धित अवश्य होता है,

अत: उसका व्यवहार सामाजिक तत्वों से अधिक प्रभावित होता है। वह वस्तु को खरीदने का निर्णय लेने से पहले इस बात पर अवश्य विचार करता है कि उसके द्वारा Buy की समाज में क्या प्रतिक्रिया होगी।

अतः इस सिद्धान्त के अनुसार एकSales manager को समाज की रीति-रिवाजों, आदतों, फैशन आदि का ध्यान रखना चाहिए।

(6) विवेकपूर्ण consumer व्यवहार(Prudent consumer behavior)-विवेकपूर्ण उपभोक्ता consumer से तात्पर्य ऐसे व्यवहार से है जिसमें वस्तु Purchase करने का निर्णय करने के लिए consumer  विवेक एवं बुद्धि को प्रधानता देता है।

इस सिद्धान्त के अनुसार consumer  द्वारा क्रय की जाने वाली वस्तु की कीमत, उपभोग, स्थिरता, सेवा, विश्वसनीयता आदि तत्वों पर विचार करके ही क्रय करने का निर्णय लेता है।  इस प्रकार के व्यवहार में क्रेता को निर्णय लेने के लिए अधिक समय एवं ध्यान की जरूरत होती है।

Consumer  व्यवहार का महत्व (Importance of Consumer Behaviour)

 Behaviour व्यवहार के महत्व को निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) उत्पादन सम्बन्धी नीतियाँ बनाने में सहायक(Assisted in making production related policies)-उत्पादन से सम्बन्धित नीतियाँ बनाने में Consumer व्यवहार का अध्ययन परम आवश्यक है।

जैसे-यदि Manager को Consumer व्यवहार के अध्ययन से पता चल जाता है कि Buyer उसकी वस्तु को अच्छी पैकिंग के कारण पसन्द करते हैं तो Manager वस्तु की पैकिंग पर अधिक ध्यान देगा।

(2) विक्रय प्रवर्तन सम्बन्धी निर्णय में सहायक(Assistant in sales enforcement decision)-वस्तु के Sales वृद्धि के लिए Sales enforcement policy consumers के व्यवहार से काफी सीमा तक प्रभावित होती है और इस प्रकार Buyer व्यवहार के अध्ययन के बिना Sales promotion के प्रयास सफल नहीं हो सकते हैं.

क्योंकि वस्तु कौन Buy कर रहा है Buyer वस्तु को किस समय खरीद रहा है ? कहाँ से खरीद रहा है ? और कैसे खरीद रहा है? आदि बातें Sales Enforcement कार्यक्रमों को प्रभावित करती हैं। Buyers के व्यवहार को ध्यान में रखकर भिन्न-भिन्न Sales promotion schemes सम्बन्धी निर्णय लिये जाते हैं

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(3) प्रतियोगिता का सामना(Face competition)-वर्तमान समय में प्रत्येक वस्तु के अनेक उत्पादक हैं। प्रत्येक उत्पादक अपनी वस्तु को यथाशीघ्र बेचना चाहता है। कुछ उत्पादक तो को लागत से कम कीमत पर बेचने के लिए तत्पर हो जाते हैं।

इस  प्रतियोगिता में वही उत्पादक अपने अस्तित्व को बचाये रख सकता है जिसने Consumer के व्यवहार का अध्ययन किया हो। 

(4) मूल्य नीतियाँ बनाने में सहायक(Assisted in formulating price policies)-किसी वस्तु का मूल्य निर्धारण करते समय Consumer Behavior का अध्ययन किया जाना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए, यदि आपकी वस्तु के Buyer Lower class के लोग हैं तो आपको किस्म की तुलना में कम मूल्य रखने को प्राथमिकता देनी  होगी।

इसके विपरीत, यदि आपकी वस्तु के Buyer High class के लोग हैं जो किसी वस्तु को इसलिए खरीदते हैं कि उनके खरीदने से Buyer का समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा तो वह उस वस्तु का अधिक Price रख सकता है 

5) फैशन में परिवर्तन की जानकारी(Fashion change information)-आज फैशन में बड़ी तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। जो Product आज Consumer / buyer पसन्द कर रहे हैं, वह कुछ ही दिनों में अप्रचलन में आ जाता है.

और Consumer  उसका त्याग कर देते हैं। ऐसी स्थिति में Product को Consumer की पसन्द.का अध्ययन करना परम आवश्यक है और उसी के अनुसार  उत्पाद में आवश्यक परिवर्तन करते रहना चाहिए।

(6) विक्रय एवं वितरण सम्बन्धी निर्णयों में सहायक(Assisted in sales and distribution decisions)-Sales and distribution सम्बन्धी निर्णयों के लिये भी Buyer के  व्यवहार का अध्ययन सहायक होता है।

उदाहरण के लिये, किसी वस्तु की बिक्री केवल इसलिये होती है कि वह बाजार में नियमित रूप से और सरलता से उपलब्ध है।

अब यदि Seller’s buyer व्यवहार का अध्ययन करके distribution  सुविधाओं पर बल देता है तो उसकी बिक्री में वृद्धि की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी।

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